:
Breaking News

दरभंगा में बैंक लोन घोटाला: बिना आवेदन के खाते में पास हो रहे थे लाखों के लोन, बैंक अधिकारी समेत दो गिरफ्तार

top-news
https://maannews.acnoo.com/public/frontend/img/header-adds/adds.jpg

दरभंगा में IOB बैंक लोन घोटाले का खुलासा। फर्जी दस्तावेजों से करीब 2 करोड़ रुपये का लोन पास, बैंक अधिकारी और मास्टरमाइंड गिरफ्तार, जांच जारी।

दरभंगा/आलम की खबर: बिहार के दरभंगा जिले से एक बड़ा और चौंकाने वाला बैंकिंग घोटाला सामने आया है, जिसने सरकारी योजनाओं और बैंकिंग प्रणाली की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। साइबर थाना पुलिस की कार्रवाई में इस पूरे रैकेट का पर्दाफाश हुआ है, जिसमें इंडियन ओवरसीज बैंक (IOB) के एक असिस्टेंट मैनेजर सहित कई लोगों की संलिप्तता सामने आई है। इस मामले में पुलिस ने असिस्टेंट मैनेजर रवि राघवेंद्र और गिरोह के मास्टरमाइंड विपिन पासवान को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।

इस पूरे घोटाले का खुलासा तब हुआ जब एक स्थानीय व्यक्ति ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई कि उसके नाम पर 18 लाख रुपये का लोन स्वीकृत कर दिया गया है, जबकि उसने कभी इसके लिए आवेदन ही नहीं किया था। यह शिकायत सामने आते ही पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू कर दी। शुरुआती जांच में ही यह साफ हो गया कि यह केवल एक व्यक्ति की धोखाधड़ी नहीं, बल्कि एक संगठित और सुनियोजित वित्तीय अपराध है।

जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि इस गिरोह ने सरकारी योजनाओं का गलत इस्तेमाल करते हुए बड़े पैमाने पर फर्जी लोन पास करवाए हैं। खासकर प्रधानमंत्री खाद्य प्रसंस्करण योजना (PMFME) जैसी योजनाओं को निशाना बनाया गया, जिसका उद्देश्य छोटे उद्यमियों को आर्थिक सहायता देना था। लेकिन आरोपियों ने इसी योजना का दुरुपयोग कर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बैंक से लोन मंजूर करवाया।

पुलिस के अनुसार, इस पूरे नेटवर्क में फर्जी व्यवसाय दिखाकर आवेदन तैयार किए जाते थे। किसी के नाम पर मिठाई की दुकान, किसी के नाम पर लेदर फैक्ट्री और अन्य छोटे व्यवसायों के नकली दस्तावेज बनाए जाते थे। इन दस्तावेजों को बैंक में जमा कर बिना किसी वास्तविक सत्यापन के लोन स्वीकृत करा लिया जाता था।

सबसे गंभीर आरोप यह है कि बैंक के अंदर बैठे कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से यह पूरा खेल चल रहा था। आरोप है कि असिस्टेंट मैनेजर रवि राघवेंद्र ने फर्जी फील्ड रिपोर्ट तैयार कर इन आवेदनों को मंजूरी दिलवाई। इसके बाद स्वीकृत लोन की राशि सीधे मास्टरमाइंड विपिन पासवान के खाते में ट्रांसफर कर दी जाती थी, जहां से पैसे को अलग-अलग हिस्सों में बांट लिया जाता था।

पुलिस जांच में अब तक 14 फर्जी खातों की पहचान की जा चुकी है, जिनका इस्तेमाल इस घोटाले में किया गया था। अनुमान है कि इस पूरे रैकेट के जरिए लगभग 2 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध निकासी की गई है। हालांकि, जांच अभी जारी है और पुलिस को आशंका है कि जैसे-जैसे मामले की तह तक जाया जाएगा, घोटाले की राशि और भी बढ़ सकती है।

इस मामले में केवल बैंक ही नहीं, बल्कि अन्य विभागों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। जांच में उद्योग विभाग से जुड़े एक कर्मी कृष्णा पासवान और बैंक के तत्कालीन शाखा प्रबंधक रविश चंद्रा का नाम भी सामने आया है। हालांकि ये दोनों फिलहाल फरार बताए जा रहे हैं और पुलिस लगातार उनके ठिकानों पर छापेमारी कर रही है।

छापेमारी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के ठिकानों से कई महत्वपूर्ण सबूत बरामद किए हैं, जिनमें फर्जी दस्तावेज, नकली बैंक मोहरें, कंप्यूटर सिस्टम और अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस शामिल हैं। इन सभी सबूतों को जब्त कर फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दिया गया है।

साइबर डीएसपी विपिन बिहारी ने इस मामले को गंभीर वित्तीय अपराध बताते हुए कहा है कि यह केवल बैंक धोखाधड़ी नहीं, बल्कि सरकारी योजनाओं और आम जनता के विश्वास के साथ किया गया बड़ा खिलवाड़ है। उन्होंने साफ कहा कि इस मामले में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और सभी आरोपियों को जल्द गिरफ्तार किया जाएगा।

पुलिस अधिकारियों का यह भी कहना है कि इस घोटाले में और भी बड़े नाम सामने आ सकते हैं, क्योंकि शुरुआती जांच में कई संदिग्ध लेन-देन और दस्तावेजों के लिंक मिले हैं। ऐसे में पूरे नेटवर्क की गहन जांच की जा रही है।

इस खुलासे के बाद बैंकिंग सिस्टम की सुरक्षा और सरकारी योजनाओं की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते ऐसी गड़बड़ियों पर नियंत्रण नहीं पाया गया, तो यह आम जनता के विश्वास को गहरी चोट पहुंचा सकता है।

फिलहाल पुलिस इस पूरे मामले की तह तक पहुंचने में जुटी है और उम्मीद की जा रही है कि आने वाले दिनों में इस घोटाले से जुड़े और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।

https://maannews.acnoo.com/public/frontend/img/header-adds/adds.jpg

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *